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इक सपना था कोई अपना था | hindi poetry | kuch apna likho

इक सपना था कोई अपना था कोई अपना था वो सपना था सपने में मिलते रहते थे बस सपने में हम सब रहते थे कितना सच्चा ये सपना था कितना अच्छा हमको लगता था क्यूं ये सपना टूट गया क्यूं सब कोई हमसे रूठ गया                                          officeidofsandeep@gmail.com