दिल नहीं पत्थर है | शायरी | kuch apna likho
दिल नहीं पत्थर है पैसा ही जिसका सब कुछ है क़ातिल भी और कत्ल भी सब जायज़ है पैसा ही जिसका माई-बाप है मूर्ख हैं वह सब लोग जो इनसे दिल लगा बैठे हैं खुद ही के पंख इन के लिए जला बैठे हैं by Sandeep Sharma