बुझती हुई आग को सुलगाने की कोशिश न कीजिए
बुझती हुई आग को सुलगाने की कोशिश न कीजिए चिंगारी को आग बनते देर नहीं लगती जो लोग खुद ही समर्थन में थे इस बिल के आज कुर्सी की खातिर इस बिल की ख़िलाफत कर रहे हैं बात तो वही हुई जनाब बाहर से कुछ और हैं हम अंदर से कुछ और हैं जनता को धोखा देना कोई आज की बात नहीं सदियों से नेता लोग लूटते आए हैं कोई नई बात नहीं है इसमें अंदाज़ बदल गया है पर लूटना अब भी जारी है सियासत कभी गरीबों की नहीं हुई सियासत उन्हीं के साथ चलती है जो उनकी जेबें गर्म करते हैं मौके का फायदा उठाना सब का पेशा बनता जा रहा है सच्ची बात न ही सुनाई जाती है और न ही सुनी जाती है आज के टी वी चैनलों का यही हाल है सियासी लोगों के खिलाफ कोई आवाज उठाता है तो उसी पर ढेरों मुकदमे डाल दिये जाते हैं और उसकी हिम्मत को तोड़ने का प्रयास शुरू हो जाता है क्या राजनेता क्या कार्यकर्ता क्या मीडिया यहां तक की पुलिस भी मूक दर्शक बनकर सारे तमाशे में अपना भरपूर योगदान देती है उसके लिए इस संसार में कोई अपना होता ही नहीं जो मिलता वही सियासत खेल जाता है ...