तुझ पे भरोसा करूं केसे | hindi poetry
तुझ पे भरोसा करूं केसे लाखों ने विश्वास तोड़े हैं अपनी फसल बेचूं कहां तूने भी तो मंडीयां मुझसे छीनी हैं By Sandeep Sharma officeidofsandeep@gmail.com
शायरी कोई खेल नहीं जज़्बात हैं।