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हम आपसे मिलने की भूल कर बैठे | hindi-urdu poetry | kuch apna likho

हम आपसे मिलने की भूल कर बैठे  आपने समझा कि हम कुछ कबूल कर बैठे यूं फिजूल की नोंक झोंक में बीत गया अरसा  कि हम खुद को रोकने की भूल कर बैठे आप थे मशरूफ अपनी जीत में इस कदर  कि हम जा चुके थे वहां से पर आप  फिर भी बोलते रहने की भूल कर बैठे officeidofsandeep@gmail.com