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हाथ रक्त से सने हैं मेरे | hindi poetry | kuch apna likho

हाथ रक्त से सने हैं मेरे जुबां पे है खौफ खुदा का है  न जाने किस ओर चला हूं मैं वक्त भी हाथ से फिसलने लगा है गुनाह मेरे माफ़ न होंगे मुझे ऐसा यक़ीन हो चला है                      संदीप शर्मा         officeidofsandeep@gmail.com