ना उम्मीदी से रोशन कभी चिराग नहीं हुआ करते | hindi poetry
ना उम्मीदी से रोशन कभी चिराग नहीं हुआ करते ना उम्मीदी से तो मायूसी फैल जाती है कभी देखा है किसी शायर के घर जाकर कितनी तकलीफ़ से गुज़रा है हर इक पल उसका संदीप शर्मा officeidofsandeep@gmail.com