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ज़रा ठहरो बातें अभी और भी हैं | hindi poetry | kuch apna likho

ज़रा ठहरो बातें अभी और भी हैं फासलों को कम करो नजदीकियों को बड़ा दो मेरे मर्ज की दवा  तुम्हारी मुस्कान ही तो है                              officeidofsandeep@gmail.com