तुम्हारी आवाज़ सुनने को तो लाखों बैठे हैं | shayri | kuch apna likho
तुम्हारी आवाज़ सुनने को तो लाखों बैठे हैं हमारी आवाज तो सिर्फ हम तक ही है तुम गुनगुनाओ कुछ तो उसे गीत कहा जाएगा हम गुनगुनाएं तो उसे शोर कहा जाएगा तुम हंसे तो उसे भी फिल्माया जाएगा हम हंसे तो गौर भी नहीं किया जाएगा written by Sandeep Sharma