कहानी घर घर की | hindi poetry
कौन अपना कौन पराया बड़ी उलझन है मेरे भाई
सुलगती है चिंगारी दूसरे की तरक्की से
होती है अन बन इसी बात पर हर मियां बीवी में
बनता नहीं है खाना जब हो जाती है लड़ाई
किसी न किसी का मुंह फुलाना लाजमी है मेरे भाई
बच्चों को भी लग जाता है चांटा बेवजह चिल्लाने पर
बड़ी दुख भरी है मेरी कहानी पर है ये घर घर की कहानी
By Sandeep Sharma
officeidofsandeep@gmail.com
Comments